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जीत का जज़्बा: भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट क्रिकेट श्रंखला

by sportifnews Desk Feb 03, 2021 • 11:40 AM Views 465
ICC Women's Cricket World Cup 2021

जीत का जज़्बा: भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट क्रिकेट श्रंखला

 

हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में समाप्त हुई क्रिकेट श्रंखला,भारतीय क्रिकेट इतिहास में स्वर्ण अक्षरों  में लिखे जाने योग्य है ,और आप माने या ना  माने ब्रिस्बेन [गाबा] में  जो ऑस्ट्रेलिया के लिए अभेद्य किला माना जाता रहा है ,जहाँ उनकी टीम १९८८ के बाद कभी नहीं हारी है ,में भारत की जीत किसी भी मायने में १९८३ की  विश्व कप विजय से कम नहीं है                                                                                                                                    

कपिल देव के नेतृत्व में गयी विश्व कप भारतीय टीम को सामान्य खिलाडियों  की टीम कहा गया और क्रिकेट पंडितों ने सेमीफइनल में भी पहुँचने की भविष्यवाणी कर दी थी। वर्तमान में भी ऑस्ट्रेलिया दौरे पर प्रथम टेस्ट मैच में ३६ रन पर आल आउट होने के बाद सभी विदेशी दिग्गजों ने भारत को - से हारने की भविष्यवाणी कर दी थी। किन्तु सभी भविष्यवाणियों को नकारते हुए पूर्व की भांति भारतीय टीम ने जुझारू क्रिकेट और जीत की उतकट इच्छा के बलबूते ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर हरा कर जीत का परचम फहरा दिया। 

 

वर्तमान श्रंखला के चौथे टेस्ट पहुँचने तक भारत को ग्यारह फिट खिलाडियों को चुनने की चुनौती थी।नियमित कप्तान विराट कोहली प्रथम टेस्ट के बाद पितृ अवकाश पर भारत वापस चुके थे और स्थानापन्न कप्तान रहाणे पर टीम के ३६ रन [अपने क्रिकेट इतिहास के निम्न तम स्कोर ]पर आउट होने के बाद नया जोश भरने की ज़िम्मेदारी थी। भारतीय टीम के सात सदस्यों के चोटिल  होने के बावजूद टीम ने अपना हौसला बनाये रखा और टीम के  रणबांकुरों ने विश्व क्रिकेट को बताया कि टूटी फूटी  टीम से भी ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम को उसके घर में भी हराया जा सकता है। प्रथम टेस्ट मैच में ३६ रन पर आउट होने के बावजूद अंतिम टेस्ट की चौथी पारी में ३२९ रन बनाकर भारतीय टीम ने जीत का परचम फहराया , जो क्रिकेट जगत की अद्वितीय घटना है। 

 

१९८८ में विव रिचर्ड्स की  वेस्ट इंडीज टीम ने गाबा में जो किया था उसके बाद रहाणे के जाबांजों ने ही उसे दोहराया। इस बीच में सचिन तेंदुलकर और ब्रायन लारा जैसे कई सितारे गाबा में आये,लेकिन गाबा को फ़तेह नहीं कर पाए। शृंखला के दौरान छः नए खिलाडियों ने भारत की टेस्ट टीम में पदार्पण किया ,जो एक रिकॉर्ड है। ऑस्ट्रेलिआई दर्शकों द्वारा मोहम्मद सिराज के खिलाफ की गयी नस्ली टिप्पणियों ने टीम की जीतने की ज़िद को और मज़बूत ही किया। 

 

ऋषभ पंत जो शुरुआती मुक़ाबलों में आलोचनाओं का शिकार हो रहे थे ,अंतिम टेस्ट में प्रतिभा का भंडार बन गए ,उनकी बल्लेबाज़ी में जीतने से ज़्यादा ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों को रौंदने का जज़्बा दिख रहा था। पंत ने अपना सौवां टेस्ट खेल रहे लियोन की  गेंदबाज़ी को तहस नहस कर दिया। उससे  पहले शुभमन गिल और पुजारा की  पारियों ने ऑस्ट्रेलिया को सोचने पर मज़बूर कर दिया और कमिंस - स्टार्क और हेज़लवुड ने पुजारा के शरीर को निशाना बनाकर उनका मनोबल तोड़ने की कोशिश की , वहीँ गिल ने खूबसूरत शॉट लगाकर गेंदबाज़ों के मंसूबों को तोड़ दिया। पुजारा ने अपने जीवन का सबसे धीमा अर्धशतक लगाया लेकिन एक छोर संभाले रखा ,जो कि अंत में निर्णायक साबित हुआ।

 

इस ऐतिहासिक जीत में भारतीय गेंदबाज़ों का योगदान भी अद्वितीय रहा। गाबा के मैदान पर ऑस्ट्रेलियाई टीम मात्र तीसरी बार दोनों पारियों में ऑल आउट  हुई। इस से पहले १९८८ में वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ और २००८ में न्यूज़ीलैण्ड के खिलाफ ढेर हुई थी। गाबा में भारत ने मैच की चौथी पारी में ३२९ रनों का पहाड़ पार किया जब कि इससे पहले २३६ रनो से ज़्यादा कभी नहीं बनाये गए। 

 

ऋषभ पंत ने जब ऑफ ड्राइव पर चौका मार कर भारत को विदेशी धरती पर सबसे बड़ी जीत दी तो भारतीय दर्शक तिरंगा लहरा कर वैसे ही दौड़ रहे थे जैसे १९८३ में लॉर्ड्स  में  भारतीय टीम की विश्व कप विजय पर या २०११ में वानखेड़े स्टेडियम में धोनी के धुरंधरों द्वारा जीत हासिल करने के बाद ख़ुशी से पागल हो कर दौड़ पड़े थे। 

 

अब भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को बेसब्री से जो रुट की इंग्लैंड टीम का इंतज़ार है ,जो की भारत में चार टेस्ट ,तीन एक दिवसीय और पांच टी -२० खेलने रही है।  दोनों टीमों को एक अच्छी श्रंखला के लिए ढेरों shubhkamnayen

 

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