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आइए याद करते हैं भारत बनाम इंग्लैंड के कुछ बेहतरीन पल…

by sportifnews Desk Mar 11, 2021 • 11:41 AM Views 578
ICC Women's Cricket World Cup 2021

आइए याद करते हैं भारत बनाम इंग्लैंड के कुछ बेहतरीन पल…

 

आजकल जब भी भारत किसी भी आई सी सी इवेंट में प्रवेश करता है, तो वह जीतने के लिए वास्तविक पसंद होते हैं या कम से कम उस इवेंट के आगे के चक्र में प्रवेश करते ही हैं। हालाँकि शुरुआती संस्करणों  के दौरान यह एक बड़ा आश्चर्य था की भारत जैसी टीम नॉक आउट चरणों में जगह बना सकती है।

 

और यह वही है जिसने १९८३ में उनकी विश्व कप विजय को यादगार बना दिया था।ज़िम्बाब्वे पर करीब करीब असंभव विजय और फाइनल में ताक़तवर वेस्ट इंडीज़ पर ऐतिहासिक जीत के बीच,सेमी फाइनल में इंग्लैंड पर उनकी आश्चर्यजनक जीत अक्सर भुला दी जाती है।

 

इंग्लैंड की टीम के खेल के सभी क्षेत्रों में बेहतर होने के बावजूद, भारतीय टीम ने कपिल देव , रोजर बिन्नी  और मोहिंदर अमरनाथ के शानदार बोलिंग प्रदर्शन के बलबूते, जिन्होंने मिलकर इंग्लैंड के सात विकेट चटकाए और इंग्लैंड को ६० ओवर में सिर्फ २१३ रनों पर रोक दिया।

 

भारतीय टीम ने धीमी शुरुआत की लेकिन दो विकेट पर ५० रन बनाकर संकट में घिर गयी। मोहिंदर अमरनाथ की ४६ रन और यशपाल शर्मा की ६१ रनों की महत्वपूर्ण पारियों ने टीम को स्थिरता प्रदान की, लेकिन अंत में यह संदीप पाटिल की विनाशकारी पारी थी, जिन्होंने ३२ गेंदों में ५१ रनों की पारी खेली, जिसने भारत को यादगार ६ विकेट से जीत दिलाई, और फाइनल में वेस्ट इडीज़ से भिड़ने की जगह पक्की करी। 

 

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२००३ का क्रिकेट विश्व कप जो की साउथ अफ्रीका, केन्या,और ज़िंबाबवे में खेला गया,भारतीय टीम के लिए एक शानदार टूनामेंट था जो की भारतीय क्रिकेट के लिए मील का  पत्थर साबित हुआ। सौरव गांगुली एक ऐसी टीम का नेतृत्व कर रहे थे जिसमें अनुभवी और युवा क्रिकेटरों का सही संतुलन था। टीम में सम्मिलित युवा क्रिकेटरों के लिए फाइनल तक का सफर ,सफलता का द्योतक थ।

 

पहले बल्लेबाज़ी करने के अपने फैसले को सही ठहराते हुए, भारत ने ११ ओवरों में ७५ रन बनाने के साथ दंगल की शुरुआत की लेकिन एंड्रू फ़्लिंटॉफ़ ने अब ब्रेक लगाया, भारतीय  टीम में सनसनी के रूप में शामिल हुए वीरेंद्र सेहवाग को कैच आउट कराने के बाद अपने पहले ८ ओवरों में मात्र ९ रन दिए, लेकिन राहुल द्रविड़ और युवराज सिंह को शांत नहीं रखा जा सका, उन दोनों ने मिलकर ६२ रनों की प्रति गेंद की दर से शानदार साझेदारी निभायी। हालांकि इंग्लैंड ने अंतिम चार गेंदों पर चार विकेट लेकर मैच में वापस आने की कोशिश की किन्तु राहुल द्रविड़ के ६२,तेंदुलकर के ५० और युवराज के ४२ रनों के सहयोग से भारत ने २५० रनों का सम्मानजनक स्कोर खड़ा कर लिया था।

 

जब इंग्लैंड ने २ विकेट के नुकसान पर ५० रन का आंकड़ा पार किया तब नेहरा की प्रभावशाली लाइन और लेंथ ने विनाश का एक मोर्चा खोल दिया,अपने तीसरे और चौथे ओवर में उन्हों ने नासिर हुसैन को कैच आउट कराया , एक शानदार इनस्विंगर से एलेक स्टीवर्ट को पगबाधा आउट किया और वॉन को एक शानदार गेंद पर विकेट के पीछे कैच करा दिया।  इंग्लैंड के शीर्ष ६ बल्लेबाज़ ६२ रन पर  आउट हो गए थे, तब इस मैच में फॉर्म में चल रहे फ़्लिंटॉफ़ ने इंग्लैंड टीम को अपमान से बचाया और ६४ रन बनाकर इंग्लैंड का कुल स्कोर १६८ तक पहुँचाया और भारत ने ८२ रनों की बड़ी जीत दर्ज की।

 

मैन ऑफ़ मैच आशीष नेहरा ने इस मैच में ९० मील प्रति घंटे की गति से सही दिशा में गेंदबाज़ी करके मात्र २३ रन देकर ६ विकेट हासिल किये जबकि इससे पहले नेहरा ने ३२ एकदिवसीय मैच खेलकर मात्र ३० विकेट लिए थे।

 

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२००७ में भारत के लिए इंग्लैंड का दौरा उनके आठ दशक के इतिहास में टीम के सबसे यादगार दौरों में से एक था। न केवल भारत ने लगभग बीस वर्षों के पश्चात् इंग्लैंड से उनके देश में टेस्ट सीरीज जीती ,वरन बहुत ही नज़दीकी ७ मैचों की एकदिवसीय श्रंखला भी अत्यधिक रोचक एवं रोमांचकारी  रही।

 

हालाँकि भारत श्रंखला के अंतिम मैच में ,जो की लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेला गया ,हार कर  श्रंखला ४-३ के अंतर से हार गया। भारतीय टीम चार मैच समाप्त होने के बाद ३-१ से पिछड़ रही थी और सीरीज एकतरफा होने का खतरा सर पर मंडरा रहा था। तभी ओवल में पांचवें मैच में जहाँ इंग्लैंड ने पहले खेल कर ३१६ रनों का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा कर दिया था ,जिसमें ओवैस शाह के शानदार १०७ रन और पीटर्सन एवं राइट के अर्धशतकों का बेहतरीन योगदान था। भारत के लिए जीत के लिए ३१७ रनों का पीछा करना काफी कठिन लग रहा था। 

 

किन्तु भारत के बल्लेबाज़ों के इरादे कुछ और ही थे। सचिन तेंदुलकर के बेहतरीन ९४ और सौरव गांगुली के शानदार ५३ रनों की परियों से भारत ने जीत की मज़बूत आधारशिला राखी,और जीत का सपना देखना शुरू किया। गौतम गंभीर ने बीच के महत्त्वपूर्ण ओवरों के दौरान स्कोर बोर्ड को आगे बढ़ाना जारी रखा। लेकिन आखिरी ओवरों में दो त्वरित विकेटों ने कार्य को बहुत कठिन बना दिया,अब स्थिति यह थी की अंतिम ओवर में सिर्फ २ विकेट बचे थे और जीत के लिए १० रन बनाने थे ,ऐसे में रोबिन उथप्पा हीरो बनकर उभरे और धैर्य के साथ खेल कर दो लगातार चौके मारकर भारत को एक यादगार जीत दिला दी और एक मैच बाकी रहते श्रंखला ३-३ से बराबर हो गयी 

 

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२०१७ में भारत के इंग्लैंड दौरे की एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय श्रंखला, एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट इतिहास में सबसे अधिक स्कोर करने वाली तीन मैचों की श्रंखला थी, जिसमें श्रंखला की छः पारियों में से प्रत्येक पारी में ३०० या उससे भी अधिक का स्कोर किया गया था।

 

उस श्रंखला के प्रथम और अंतिम मैच अपने आप में यादगार थे, जो कि केदार जाधव द्वारा खेली गयी शानदार पारियों से सजे हुए थे ।किन्तु यह श्रंखला का दूसरा मैच था जो सबसे यादगार था और इसके शिल्पी थे ,भारत की ओर से  युवराज सिंह और महेंद्र सिंह धोनी एवं इंग्लैंड की ओर से इयोन मॉर्गन।

 

हुआ यूँ कि भारत के दूसरे और तीसरे विकेट गिर जाने के बाद,दो भारतीय दिग्गज बल्लेबाज़ों ने चौथे विकेट के लिए रिकॉर्ड साझेदारी करते हुए २५६ रन बनाये,जिसमें युवराज सिंह ने १५० रनों की शानदार पारी खेली और धोनी ने भी १३४ रनों  की महत्वपूर्ण पारी खेली। इस प्रकार भारत ने अपने निर्धारित ५० ओवरों में ६ विकेट पर ४८१ रनों का बड़ा स्कोर खड़ा किया।

 

इंग्लैंड ने जैसन रॉय और जो रुट द्वारा अर्धशतकीय पारियों की बदौलत एक शानदार शुरुआत की , लेकिन वह इयोन मॉर्गन द्वारा खेली गयी [८१ गेंदों पर १०२ रनों ] की बेहतरीन पारी थी जिसने इंग्लैंड की टीम को लक्ष्य के बहुत करीब पहुंचा दिया था। लेकिन पारी के ४९वें ओवर में मॉर्गन के आउट होते ही भारत १५ रनों से जीत गया और इंग्लैंड की पारी ३६६ रनों पर समाप्त हो गयी।  

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भारतीय टीम - आगामी श्रृंखला के लिए शुभकामनाएँ!

 

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